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खंडवा की अनाज मंडी में बवाल गेंहू के दाम घटते ही किसानों ने किया हंगामा,कांग्रेस ने दिया समर्थन

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खंडवा की अनाज मंडी में बवाल गेंहू के दाम घटते ही किसानों ने किया हंगामा,कांग्रेस ने दिया समर्थन

खंडवा/
जिले की अनाज मंडी में सोमवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब किसानों ने गेहूं के दाम में अचानक 300 रुपये की कटौती पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। सुबह तुलाई शुरू होते ही व्यापारियों द्वारा कम भाव घोषित किए गए, जिससे किसानों में आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते किसानों और व्यापारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में किसान एकजुट हो गए और मंडी प्रशासन व सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे।
जिला कांग्रेस प्रवक्ता प्रेमांशु जैन ने बताया कि हंगामे की सूचना मिलते ही ग्रामीण कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह और किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष सोनू गुर्जर मौके पर पहुंचे और किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया। उन्होंने मंडी की अव्यवस्थाओं को उजागर करते हुए पेयजल व्यवस्था, टंकी की सफाई और किसानों के रुकने की समुचित व्यवस्था की मांग उठाई।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार पर किसान विरोधी नीतियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर किसानों को उचित मूल्य दिलाना चाहिए।
कांग्रेस प्रतिनिधियों ने, तहसीलदार, नायाब तहसीलदार मंडी प्रशासन से बातचीत कर किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की और चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।मंडी प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।
स्थिति बिगड़ती देख मंडी सचिव रामवीर किरार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने व्यापारियों से बातचीत कर मामला शांत करने का प्रयास किया, लेकिन व्यापारी किसानों के बीच सीधे आने से बचते नजर आए। करीब एक घंटे तक चले हंगामे और समझाइश के बाद दोबारा खरीदी शुरू हो सकी।
किसानों ने आरोप लगाया कि पहले ही समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी देर से शुरू की गई है, ऊपर से पंजीयन प्रक्रिया में कई तरह की बाधाएं आ रही हैं। क्षेत्र के किसान जमनालाल ने बताया कि “पंजीयन खुलने के बाद भी स्लॉट बुक नहीं हो पा रहे हैं, जिससे मजबूरी में किसानों को मंडी में कम दाम पर उपज बेचनी पड़ रही है।”
हैरानी की बात यह रही कि करीब एक घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान कोई भी जनप्रतिनिधि किसानों के बीच नहीं पहुंचा। किसानों में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखी गई। उनका कहना था कि जब जरूरत होती है, तब कोई जिम्मेदार सामने नहीं आता। कुल मिलाकर, समर्थन मूल्य से कम दाम और व्यवस्थागत खामियों को लेकर किसानों का गुस्सा साफ तौर पर सामने आया, जिसने मंडी प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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